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afim niti की अफीम नीति | afim patta list 2022 – 23 pdf

kisan news : अफीम की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किसानो के हित में afim niti 2022 23 नयी अफीम नीति घोसित की है। afeem niti की अफीम नीति afim patta list 2022 – 23 pdf इस वर्ष नीति के आधार पर अफीम के किसानो को काफी फायदा होगा। आगे पोस्ट में जानिए की सरकार ने अफीम के किसानों के लिए क्या क्या नए कानून बनाये है। afim niti की अफीम नीति afim patta list 2022 – 23 pdf

अफीम नीति घोषित : काले सोने का रकबा बढ़ेगा, तो उत्पादन भी होगा ज्यादा, किसानों की संख्या हजारों में, इस आधार पर मिलेंगे वर्ष 99-2000 से रुके पट्टे, किन कोशकारों को जारी होंगे लायसेंस, सांसद सुधीर गुप्ता का बड़ा बयान आया सामने।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा प्रति वर्ष नई अफीम नीति घोषित की जाती है, जिसे देश के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश में लागू किया जाता है। जिसके अनुरूप अफीम पट्टे वितरित होते है। इसी के चलते प्रति वर्ष अफीम काश्तकारों को नई अफीम नीति का काफी बेसब्री से इंतेजार रहता है। नई अफीम नीति निर्धारण की प्रक्रिया के अंतर्गत अपुभ्म उत्पादक राज्यों के नारकोटिक्स मुख्यालयों पर सलाहकार समिति की बैठकों के बाद 6 सितंबर 2022 को नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक भी सम्पन्न हो चुकी है।

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afim patta list mandsaur division 1 2022 23

लांसिंग के माध्यम से अफीम गोंद प्राप्त करने के लिए पात्र किसानों के नाम की सूचि देखने के लिए pdf download करें। afeem patta list mandsaur

afim patta list mandsaur division 2022 23 DOO-2

नई अफीम नीति घोषित :

काले सोने का रकबा बढ़ेगा, तो उत्पादन भी होगा ज्यादा, किसानों की संख्या हजारों में, इस आधार पर मिलेंगे वर्ष 99-2000 से रुके पट्टे, किन कोशकारों को जारी होंगे लायसेंस, सांसद सुधीर गुप्ता का बड़ा बयान आया सामने।

केन्द्र सरकार द्वारा 1 अक्टूबर 2022 को शुरू और 30 सितंबर 2023 को समाप्त होने वाले अफीम फसल वर्ष के दौरान अफीम पोस्ते की खेती के लिए लाइसेंसों की मंजूरी दे दी गई है। यानी सरकार द्वारा नई अफीम नीति घोषित कर दी गई। जिसे लेकर अधिसूचना भी जारी की। इसी नई अफीम नीति को लेकर सांसद गुप्ता का बड़ा बयान भी सामने आया है।

नई नीति को लेकर जब नीमच-मंदसौर क्षैत्रिय सांसद सुधीर गुप्ता से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि, अफीम नीति- 2022-23 अब तक की सबसे अच्छी नीति घोषित हुई है। इसके बाद जहां एक और रकबा भी बढ़ेगा, तो वहीं दूसरी और अफीम का उत्पादन भी काफी हद का ज्यादा देखने को मिलेगा। वर्ष- 2022-23 में अफीम की खेती करने वाले किसानों की संख्या देशभर में करीब 90 हजार होगी, जो कि काफी खुशी की बात भी है।

आपकों बता दें कि इस बार 4.2 से अधिक औसत देने वाले अफीम काश्तकारों को 10-10 आरी के पट्टे दिए जाएंगे। इसमे खास बात यह भी देखने को मिलेगी कि, वर्ष 1999-2000 से लेकर साल 2021-22 तक जिन भी अफीम काश्तकारों की अफीम घटियां रहीं, और जिनकी अफीम का औसत 6 के उपर रहा। उन्हें भी मार्फिन के आधार पर सीपीएस पद्द्ति के तहत सरकार की और से लायसेंस जारी किये जाएंगे।

वे किसान जिन्होंने फसल वर्ष 2021-22 में मार्फीन की औसत उपज (MQY-M) 3.0 किलोग्राम / हेक्टेयर या इससे अधिक लेकिन 4.2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम जमा कराई हो .

afim niti 2022- 23 लाइसेंस की शर्तें

किसी भी किसान को तब तक लाइसेंस मंजूर नहीं किया जाएगा जब तक वह निम्नलिखित शर्तों को पूरा न करता हो/करती हो

(1) उसने कभी भी अफीम पोस्त की अवैध खेती न की हो तथा स्वापक औषधि तथा मन:प्रभावी द्रव्य पदार्थ अधिनियम, 1985 और उसके अंतर्गत बनाये गए नियमों के अंतर्गत उस पर किसी अपराध के लिए किसी सक्षम न्यायालय में आरोप नहीं लगा सिद्ध किया गया हो।

(2) उसने फसल वर्ष 2021-22 के दौरान पोस्त की खेती के लिए लाइसेंसशुदा वास्तविक क्षेत्र से 5% ‘क्षम्य क्षेत्र’ से अधिक क्षेत्र में खेती न की हो।

(3) फसल वर्ष 2021-22के दौरान उसने केन्द्रीय नार्कोटिक्स ब्यूरो/नार्कोटिक्सआयुक्त द्वारा किसानों को जारी किन्हीं
विभागीय अनुदेशों का उल्लंघन नहीं किया हो।

अफीम नीति 2022 – खेती हेतु पात्रता

  • वे किसान जिन्हों से फसल वर्ष 2021-22 में अपनी सम्पूर्ण खड़ी पोस्ट फसल की इस बारे में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार तथा केन्द्रीय स्वापक ब्यूरो की निगरानी में जुताई करा दी हो: किसान जोकि फसल वर्ष 2021-22 में लाइसेन्स पाने के पात्र थे लेकिन किसी कारण से वे लाइसेन्स प्राप्त नहीं कर पाये या लाइसेन्स जारी नहीं किया जा सका, या जिन्होने लाइसेन्स जारी होने के बाद भी किसी कारण से अफीम की खेती वास्तव में नहीं की थी:
  • किसी कानूनी उत्तराधिकारी को लाइसेन्स अंतरित किए जाने के मामले में मृतक किसान के द्वारा किए गए जमा के औसत पर भी जमा की जानेवाली अफीम के कुल औसत की गणना करते समय ध्यान दिया जायेगा:
    मृतक किसान के कानूनी उत्तराधिकारियों में से ऐसा कोई भी उत्तराधिकारी जिसे विधिवत प्रक्रिया का अनुपालन करने के बाद निर्धारित किया गया हो और वह फसल वर्ष 1999-2000 से लाइसेन्स का पात्र हो, लाइसेन्स प्राप्त नहीं कर पायेगा यदि उसके यहाँ कानूनी उत्तराधिकार को लेकर कोई विवाद चल रहा हो:
  • वे किसान जिनके लाइसेन्स को फसल वर्ष 1999-2000 से 2021-22 के दौरान इस आधार पर रद्द कर दिया गया था कि उन्होने घटिया किस्म की अफीम जमा कराई थी लेकिन नीमच या गाजीपुर के सरकारी अफीम क्षारोद कारख़ाना में किए गए परीक्षण से पता चला कि उनमें मोर्फीन का अवयव 6% से अधिक था:
  • वे किसान जोकि लांसिंग के बाद अफीम के गोंद को प्राप्त करने के लिये अफीम पोस्ट की खेती करने के लिये लाइसेन्स प्राप्त करने के पात्र हों, बशर्ते कि वे स्वेच्छा से यह विकल्प लें कि वे ऐसे पोस्ट भूस के उत्पादन के लिये अफीम पोस्त की खेती करेंगे जिसकी लंसिंग से उसका रस न निकलता हो:
  • ऐसे किसान जिनके लाइसेन्स को फसल वर्ष 1998-99 से फसल वर्ष 2020-21 के दौरान रद्द कर दिया गया हो लेकिन उन्होने ने लाइसेन्स के रद्द किए जानेवाले वर्ष को मिलाकर लगातार चार वर्षो तक ऐसी औसत अफीम /मोर्फीन जमा कराई हो जिनमें कुल MQY ( अगले वर्ष की लाइसेंसिंग के लिए निर्धारित) के 100% या इससे अधिक हो।

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