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गरीबों की थाली से गायब होगी दाल, थोक में सौ रु. और फुटकर में 140 रु. किलो हुई तुअर दाल

Kisaan News. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए शाकाहारियों के लिए दालें ही प्रोटीन का प्रमुख साधन बन गई हैं। गरीबों से लेकर अमीरों तक में दालों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। उधर, सरकारी दावों के विपरीत दालों की पैदावार में अपेक्षित इजाफा होने पर संदेह है। लिहाजा जिस बाजार में सभी तरह की दलहन फसलों के मूल्य में तेजी का रुख है। चने को छोड़कर बाकी सभी दालों के मूल्य सौ रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर जा पहुंचे हैं। थोक बाजार में साबुत दलहनी फसलें सरकार के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक पर विक रही हैं जिसका लाभ किसानों को मिलने लगा है। लेकिन गरीबों की थाली से दालों के छूमंतर होने का खतरा बढ़ गया है।

कोरोना के कारण बढ़ रही महंगाई

कोरोना संकट के बीच जनता पर महंगाई की मार भी पड़ रही है। थोक में तुअर दाल इस समय सौ रुपये किलोग्राम तक पहुंच गई है तो फुटकर में यह 140 रुपये किलोग्राम तक मिल रही है। इसी तरह मूंग थोक में 95 रुपये किलोग्राम है तो चना दाल के भाव 70 रुपये किलोग्राम है। फुटकर में मूंग दाल 120 और चना दाल 90 रुपये किलोग्राम के आसपास है। दालों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग मांग और आपूर्ति पर नजर रख रहा है। आकलन करने के बाद केंद्र सरकार के फीडबैक के आधार पर कदम उठाए जाएंगे।

किसानों को नही मिल रहा फायदा

वहीं, कृषि मंत्री कमल पटेल का कहना है कि अभी तक मुनाफा सिर्फ विचौलिए कमाते थे। पहली बार गेहूं के साथ चना, मसूर और उड़द की खरीद करके किसानों को समर्थन मूल्य दिलाया गया है। दलहन उत्पादन के मामले में मध्य प्रदेश का देश में महत्वपूर्ण स्थान है। यहां से दाल पूरे देश में जाती है। तुअर (अरहर) और चना दाल की खपत भी अच्छी खासी है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2019-20 में प्रदेश में तुअर का क्षेत्रफल ढाई लाख हेक्टेयर और उत्पादन तीन लाख टन के आसपास था।

चना को सवा 10 लाख हेक्टेयर में बोया गया और उत्पादन 31 लाख टन हुआ। वहीं, उड़द को 17.62 लाख हेक्टेयर में बोया गया और 4.6 लाख टन उत्पादन हुआ। दलहन विकास कार्यक्रम के तहत किसानों को दलहन फसलों के लिए प्रोत्साहित भी किया गया पर उपज की कीमत सही नहीं मिल रही थी। कृषि मंत्री कमल पटेल का कहना है कि किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने के लिए पहली बार खरीद की व्यवस्था में परिवर्तन किया गया। गेहूं के साथ खरीद प्रारंभ की।

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इसका फायदा यह हुआ कि जो चना बाजार में 4300 से 4500 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा था वो 5100 के ऊपर पहुंच गया। थोक दाल कारोबारी भगवान दास अग्रवाल का कहना है कि पिछले साल लाकडाउन के समय जो कीमत बढ़ी थी, वो इस बार नहीं है। अभी नई दाल की मांग रहती है लेकिन इस बार कमी है।

जानिए क्या है दालों के थोक भाव

चना दाल – 70-80 रुपये किलो
तुअर दाल – 97 से 100,
मूंग – 95-100 रुपये
उड़द – 100 रुपयेइसे भी पढ़ें – सोयाबीन की अधिक उपज देने वाली कीट प्रतिरोधी नयी वैरायटी

व्यापारी उठायेगें फायदा

चना का वफर स्टाक फिलहाल अब तक के न्यूनतम स्तर स्तर 12 लाख टन पर पहुंच गया है। चालू सीजन में कुल सवा तीन लाख टन चने की खरीद हो सकी है, जबकि अरहर का बफर स्टाक 3.35 लाख टन है। यह पिछले वर्षों का खरीदा हुआ माल है। अधिकतम वफर स्टाक40 लाख टन तक रह चुका है। जिस कारोबारियों को पता चल चुका है कि उपज अपेक्षित नहीं है।

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